सहिया पर कमीशन लेकर निजी अस्पताल ले जाने का आरोप, जांच में मौके पर नहीं मिला कोई योग्य चिकित्सक; स्वास्थ्य विभाग ने एफआईआर की तैयारी शुरू की
लेस्लीगंज।
पलामू जिले के लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के ढेला गांव स्थित न्यू आशीर्वाद हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान एक नवजात शिशु की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को दोबारा सील कर दिया है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और एक स्वास्थ्य सहिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के संचालन में कई अनियमितताओं की पुष्टि की है।
मृत नवजात के पिता संजीत राम और मां प्रिया कुमारी, जो बरवाडीह थाना क्षेत्र के पोखरी गांव के निवासी हैं, ने आरोप लगाया कि गांव की स्वास्थ्य सहिया अंजू देवी ने सुरक्षित प्रसव का भरोसा देकर उन्हें सरकारी अस्पताल की बजाय निजी अस्पताल पहुंचाया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और योग्य चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे, जिसके कारण प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, नीलांबर-पीतांबरपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन तथा लेस्लीगंज थाना के एसआई विक्रम शील पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और जांच शुरू की।
जांच में सामने आया कि अस्पताल का निबंधन डॉ. अभिजीत आनंद के नाम पर है, जबकि वे वर्तमान में चतरा में कार्यरत हैं। वहीं ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक के रूप में डॉ. जन्मेजय का नाम दर्ज था, लेकिन जांच के दौरान अस्पताल में कोई भी डिग्रीधारी चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार मौके पर केवल अस्पताल संचालक विकास कुमार कुशवाहा मौजूद थे, जिन पर बिना आवश्यक योग्यता के चिकित्सा कार्य कराने का आरोप है।
जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली कि पूर्व में इसी अस्पताल को कथित अनियमितताओं और मौतों के मामलों के बाद सील किया गया था। आरोप है कि बाद में उसी भवन और संसाधनों के साथ केवल नाम बदलकर “न्यू आशीर्वाद हॉस्पिटल” के नाम से दोबारा संचालन शुरू कर दिया गया।
प्राथमिक जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को पुनः सील कर दिया है। सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि नियमों के उल्लंघन और लापरवाही की पुष्टि होती है तो अस्पताल संचालक, संबंधित सहिया और अन्य जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद क्षेत्र में निजी अस्पतालों की निगरानी और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा अवैध अस्पतालों के विरुद्ध नियमित अभियान चलाने की मांग की है।






