पलामू।
आपसू नेता राहुल दुबे ने रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया की नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में गोपनीय मुद्रण (प्रिंटिंग) कार्य में तय दरों से अधिक भुगतान करने का मामला सामने आया है। विशेष अंकेक्षण (स्पेशल ऑडिट) की जाँच रिपोर्ट में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद, 2,14,784 की वसूली करने और दोषी अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
दस्तावेज़ के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन और कोयल एजेंसी (जानकी ईमेल प्रा० लि०) के बीच 6 फरवरी 2023 को गोपनीय मुद्रण कार्य के लिए एक इकरारनामा (एग्रीमेंट) हुआ था। इस समझौते की वैधता तीन वर्षों के लिए तय की गई थी, जिसके तहत मुद्रण की दरें पहले से निर्धारित थीं। जाँच में पाया गया कि सत्र 2022-26 की तृतीय सेमेस्टर परीक्षा-2025 के कुछ विषयों के प्रश्नपत्रों की छपाई के लिए 9 अप्रैल 2025 को कार्यादेश जारी किया गया था। इस कार्य का भुगतान पुरानी निर्धारित दरों के बजाय 14 जून 2025 से लागू हुई नई और बढ़ी हुई दरों पर कर दिया गया।
नियमों की अनदेखी ऑडिट रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कार्यादेश 9 अप्रैल 2025 को जारी हुआ था, जो कि नई दरें लागू होने (14 जून 2025) से पहले की तारीख थी। नियमानुसार, इस कार्य का भुगतान फरवरी 2023 के मूल इकरारनामे में तय दरों के आधार पर ही किया जाना चाहिए था। बढ़ी हुई दरों पर भुगतान किए जाने के कारण विश्वविद्यालय कोष को 2,14,784 का अतिरिक्त नुकसान हुआ है।
अंकेक्षण निदेशालय ने इस मामले को वित्तीय विसंगति माना है और तय दर से अधिक भुगतान की गई कुल राशि 2,14,784 को संबंधित दोषी या उत्तरदायी व्यक्ति से वसूल करने का निर्देश दिया है। वसूल की गई राशि को विश्वविद्यालय के उचित खाते में जमा कराने, रिपोर्ट भेजने, पूरी कार्रवाई की जानकारी जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
आपसू नेता राहुल दुबे ने कहा कि सत्र देरी, परीक्षा परिणाम में सुस्ती, प्रमाण पत्र वितरण में लापरवाही लेकिन भुगतान में नियमों को ताक पर रख कर किया जाना साफ बताता है की कुलपति के साथ साथ परीक्षा विभाग की भूमिका भी संलिप्त रही है। अधिकारी बच्चे के भविष्य के बजाए पैसे कैसे कमाएं इसके लिए ज्यादा बैठक करते हैं । कोयल कंपनी को इस हेराफेरी के लिए ब्लैकलिस्टेड करने की मांग की है। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अमरनाथ तिवारी ने कहा कि विगत दो वर्षों में एनपीयू में करोड़ों के गबन और घोटाले की पुष्टि राज्यपाल सचिवालय द्वारा गठित अंकेक्षण रिपोर्ट में साबित हो चुका है फिर लोकभवन और माननीय कुलाधिपति मौन क्यों हैं यह समझ से परे है।
आपसू नेता कमलेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि अंकेक्षण रिपोर्ट में गबन और घोटाले सामने आ चुके हैं। उसके बाद भी सरकार की खामोशी संदेहास्पद है। स्थानीय वित्त मंत्री तत्काल सभी संलिप्त पदाधिकारी पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए इन्हे पदमुक्त करने की अनुशंसा करें और विगत दो वर्षों के घोटाले के जो भी मामले आए हैं सभी की सीआईडी जांच कराए ।






