मोहम्मदगंज (पलामू)।
मोहम्मदगंज प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव को लेकर आजसू पार्टी के केंद्रीय सदस्य मंजीत कुमार मेहता ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग का ध्यान गंभीर जनहित के मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने अस्पताल में तत्काल कम-से-कम एक एमबीबीएस चिकित्सक की स्थायी नियुक्ति तथा आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
मंजीत कुमार मेहता ने कहा कि मोहम्मदगंज प्रखंड में करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया है, लेकिन आज तक यहां एक भी एमबीबीएस डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है। चिकित्सकों और मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में अस्पताल आम लोगों के लिए लगभग निष्प्रभावी साबित हो रहा है।
उन्होंने बताया कि सामान्य बीमारी, गर्भवती महिलाओं की प्रसव संबंधी समस्याएं, सड़क दुर्घटना या सांप एवं अन्य विषैले जीव-जंतुओं के काटने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को लगभग 20 किलोमीटर दूर अनुमंडलीय अस्पताल, जपला रेफर कर दिया जाता है। वहां पहुंचने के रास्ते में तीन रेलवे फाटक पड़ते हैं, जिनके कारण इलाज में और अधिक विलंब होता है। समय पर उपचार नहीं मिलने से कई मरीजों की जान तक जा चुकी है।
आजसू नेता ने कहा कि सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कई मामलों में अस्पताल में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) तक की समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। वर्तमान वर्षा ऋतु में सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन तथा अन्य जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता नहीं होने से लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की स्वास्थ्य नीति के अनुसार प्रत्येक प्रखंड अस्पताल में कम-से-कम एक एमबीबीएस चिकित्सक एवं आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद मोहम्मदगंज अस्पताल में अब तक डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
मंजीत कुमार मेहता ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि मोहम्मदगंज प्रखंड अस्पताल में तत्काल कम-से-कम एक एमबीबीएस डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति की जाए तथा एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन, जीवनरक्षक दवाएं और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य सुविधा का विषय नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन और उनके संवैधानिक स्वास्थ्य अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला है। यदि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो मोहम्मदगंज की जनता लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित प्रशासन की होगी।






