मेदिनीनगर।
पलामू शहर में बढ़ते पेयजल संकट और जल स्रोतों के लगातार खत्म होते अस्तित्व को लेकर वरिष्ठ नागरिक मंच, पलामू ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। मंच के राकेश सिंह समेत अन्य ने शहर के विभिन्न तालाबों एवं कुओं की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए अविलंब संरक्षण एवं पुनर्जीवन की दिशा में ठोस कार्रवाई की मांग की है।
मंच द्वारा इस सिलसिले में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया है। इसे लेकर सर्किट हाउस में रविवार को पत्रकारों को जानकारी दी गई।
मंगल सिंह ने कहा कि कभी मेदिनीनगर शहर के विभिन्न मोहल्लों में तालाब एवं कुएं जल संरक्षण के प्रमुख स्रोत हुआ करते थे, परंतु आज अधिकांश तालाब अतिक्रमण, गंदगी एवं उपेक्षा का शिकार हो चुके हैं। हर वर्ष गर्मी के मौसम में शहर में उत्पन्न पेयजल संकट का मुख्य कारण इन जल स्रोतों का लगातार समाप्त होना बताया गया है।
ज्ञापन में नावाटोली तालाब की स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया गया है। कहा गया कि यह तालाब कभी बड़ा जल स्रोत था, लेकिन आज कूड़ादान में तब्दील हो चुका है। तालाब के वास्तविक क्षेत्रफल के साथ छेड़छाड़ की गई है तथा जल संग्रह और निकासी के मार्ग बाधित हो चुके हैं। वर्तमान में तालाब पूरी तरह कूड़ा-करकट एवं गंदगी से भरा पड़ा है।
इसी प्रकार आबादगंज तालाब, जो कई हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ था, अब अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहा है। आबादगंज क्षेत्र पहले से ही पेयजल संकट से प्रभावित इलाकों में शामिल है और तालाब के सूखने एवं गंदगी से भर जाने के कारण जल संकट और गहरा गया है। तालाब लगभग 80 प्रतिशत मृतप्राय स्थिति में पहुंच चुका है।
बस स्टैंड तालाब की संरचना को भी ऐतिहासिक बताया गया है। बताया गया है कि यह तीन तालाबों की प्रणाली पर आधारित था, जहां पहले तालाब में शहर का गंदा पानी जमा होता था, जो छनकर दूसरे और फिर तीसरे तालाब तक पहुंचता था। अंतिम तालाब में स्वच्छ जल संग्रहित होता था। लेकिन आज पहले और दूसरे तालाब पर अतिक्रमण, गंदगी और कूड़े का कब्जा हो चुका है तथा तीन में से दो तालाब पूरी तरह मरणासन्न स्थिति में पहुंच गए हैं।
हमीदगंज तालाब के संबंध में मंच ने कहा कि यह भी लगभग 70 प्रतिशत अपना अस्तित्व खो चुका है और चारों ओर से कूड़ा-करकट फेंके जाने के कारण इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इसके अलावा रोटरी स्कूल तालाब, शाहपुर तालाब और पनेरी बांध तालाब की हालत भी चिंताजनक बताई गई है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि शहर के विभिन्न तालाबों में वर्षा जल संग्रह एवं निकासी के लिए विशेष मार्ग बनाए गए थे, लेकिन वर्तमान में वे मार्ग अवरुद्ध हो चुके हैं, जिससे तालाब धीरे-धीरे मृतप्राय होते जा रहे हैं।
मंच ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ियां इस लापरवाही को कभी माफ नहीं करेंगी।






