मेदिनीनगर।
पलामू जिले के पाटन प्रखंड स्थित किशुनपुर ओपी को पिकेट बनाए जाने के विरोध में रविवार को स्थानीय व्यवसायियों और आमजनों में भारी आक्रोश देखने को मिला। विरोध स्वरूप किशुनपुर बाजार की सभी दुकानें बंद रखी गईं। व्यवसायियों ने इस निर्णय को क्षेत्र की सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के लिए नुकसानदायक बताते हुए चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है।
रविवार को किशुनपुर देवी मंडप के समीप पूर्व जिला परिषद सदस्य के नेतृत्व में व्यवसायियों और ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में किशुनपुर ओपी को पिकेट में बदलने के निर्णय की कड़ी निंदा की गई। सर्वसम्मति से तय किया गया कि शुक्रवार को जिले के वरीय अधिकारियों को लिखित रूप से ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में चक्का जाम सहित उग्र आंदोलन किया जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किशुनपुर कभी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र रहा है। वर्षों तक यहां भय और असुरक्षा का माहौल बना रहता था, जिसके कारण व्यवसायिक गतिविधियां प्रभावित होती थीं। वर्ष 2009 में पुलिस पिकेट स्थापित होने के बाद क्षेत्र में धीरे-धीरे शांति कायम हुई और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला। बाजार का विस्तार हुआ तथा मुख्य सड़क के दोनों ओर दुकानें खुलनी शुरू हुईं।
व्यवसायियों ने बताया कि वर्ष 2014 में सांसद बनने के बाद विष्णुदयाल राम ने किशुनपुर को गोद लिया था। इसके बाद क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिली। स्टेट बैंक की शाखा स्थापित कराई गई तथा कई सड़कों का निर्माण हुआ। वर्ष 2018 में किशुनपुर पुलिस पिकेट को ओपी का दर्जा मिलने के बाद क्षेत्र में अमन-चैन कायम हुआ और लोग बिना भय के कारोबार करने लगे।
व्यवसायियों ने कहा कि अचानक ओपी के स्थान पर पिकेट लिखे जाने से लोगों में भय का माहौल बन गया है। लगन के समय दुकानदार देर रात तक दुकानें संचालित करते थे, लेकिन अब सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति उत्पन्न हो गई कि ओपी को फिर से पिकेट में बदलना पड़ा।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि पुलिस पिकेट स्थापित होने से पहले क्षेत्र में उग्रवादियों द्वारा कई घटनाओं को अंजाम दिया गया था। एक निजी चिकित्सक की हत्या कर दी गई थी तथा पुलिस और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ भी हुई थी। इन घटनाओं के बाद व्यवसायियों में लंबे समय तक भय बना रहा।
इस मामले को लेकर नंदकुमार राम ने किशोर कौशल से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया। डीआईजी ने कहा कि मीडिया और अखबारों में प्रकाशित खबर उनके संज्ञान में है तथा यह जांच कराई जाएगी कि किस अधिकारी के निर्देश पर ओपी को पिकेट में बदला गया है।
नंदकुमार राम ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। बैठक में सुखलाल प्रजापति, इकबाल अंसारी, संतोष उपाध्याय, महेंद्र चौधरी, सुभाष साव, विकास उपाध्याय, विनोद सोनी, नवल किशोर तिवारी, श्रीकांत तिवारी, अजय प्रसाद, हिमांशु कश्यप, ओमप्रकाश गुप्ता, राजीव मालाकार, प्रमोद गिरी, संतोष पांडेय, धीरेंद्र नारायण उपाध्याय, विकास रजक, राजू पासवान, कृष्ण उपाध्याय, प्रदीप दुबे, देवेंद्र सोनी, विजय सोनी, बिहारी सोनी, सुशील कश्यप, ददन गुप्ता, सरफुद्दीन अंसारी, मोहम्मद नईम अंसारी समेत कई व्यवसायी और ग्रामीण मौजूद थे।






