मेदिनीनगर।
पलामू प्रमंडल के एकमात्र मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में शीघ्र ही अत्याधुनिक वर्चुअल डिसेक्शन टेबल उपलब्ध होने जा रही है। इस थ्री-डी तकनीक आधारित मशीन के आने से शवों की कमी के कारण प्रभावित हो रही एनाटोमी की पढ़ाई को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि यह मशीन मृत शवों का पूर्ण विकल्प नहीं है, लेकिन शवों की अनुपलब्धता में भी अध्ययन और प्रशिक्षण का कार्य बिना रुके जारी रखा जा सकेगा।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पी.एन. महतो ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से कॉलेज को जल्द वर्चुअल डिसेक्शन टेबल उपलब्ध कराने की सूचना दी गई है। इस अत्याधुनिक टेबल की कीमत करीब तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके माध्यम से छात्र शवों के वास्तविक चित्रों के साथ मानव शरीर की संरचना को गहराई से समझ सकेंगे। यह टेबल डिजिटल लाइब्रेरी के रूप में भी उपयोगी होगी, जिससे शिक्षकों को पढ़ाने में विशेष सहायता मिलेगी। थ्री-डी स्क्रीन की मदद से मेडिकल छात्र मानव शरीर की उसी तरह परत-दर-परत चीड़फाड़ (डिसेक्शन) कर सकेंगे, जैसा कि वास्तविक मृत शरीर पर किया जाता है।
एनाटोमी विभागाध्यक्ष डॉ. मारग्रेट रोशनी धन ने बताया कि वर्चुअल डिसेक्शन टेबल से मेडिकल छात्र मानव शरीर की सभी संरचनाओं और स्थितियों का बेहतर अध्ययन कर सकेंगे। इससे छात्रों का तकनीकी ज्ञान बढ़ेगा और भविष्य में स्वास्थ्य मॉनिटरिंग से जुड़े पहलुओं को समझने में भी यह तकनीक उपयोगी सिद्ध होगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मशीन मृत शवों का पूर्ण विकल्प नहीं हो सकती।
उन्होंने बताया कि नियम के अनुसार प्रत्येक 10 छात्रों पर एक शव की आवश्यकता होती है। पलामू मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में पढ़ रहे लगभग 100 छात्रों के लिए 10 शवों की आवश्यकता है, जबकि कॉलेज में फिलहाल केवल 5 शव ही उपलब्ध हैं। कॉलेज को अब तक 4 लोगों ने शरीर दान करने की सहमति दी है, लेकिन सहमति के एक साल बाद भी ऐसे दानदाताओं को प्रशासनिक स्तर पर कोई सम्मान नहीं मिल सका है। वर्चुअल डिसेक्शन टेबल के आने से जहां मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है, वहीं शवों की कमी की समस्या को लेकर प्रशासन और समाज दोनों को संवेदनशील पहल करने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।






