
मेदिनीनगर।
प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर में स्थित एकमात्र सरकारी चिकित्सा संस्थान मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) की व्यवस्थाएं गंभीर सवालों के घेरे में हैं। हालात ऐसे हैं कि कई ओपीडी में न तो पर्याप्त लाइट की व्यवस्था है और न ही बुनियादी संसाधन उपलब्ध हैं। मजबूरी में डॉक्टरों को मरीजों का इलाज मोबाइल की रोशनी में करना पड़ रहा है।
केस – 1 : (मेडिसिन ओपीडी)
ओपीडी में अंधेरा, मोबाइल से इलाज, मंगलवार की शाम करीब 5 बजे के बाद एमएमसीएच के ओपीडी कॉम्प्लेक्स में स्थित मेडिसिन ओपीडी को छोड़कर लगभग सभी ओपीडी में बिजली गुल रही। करीब 10 मिनट से अधिक समय तक लाइट नहीं रहने के कारण पूरा ओपीडी परिसर अंधेरे में डूबा रहा। इसी दौरान जब मरीज इलाज के लिए पहुंचे तो डॉक्टरों को मजबूरी में मोबाइल फोन की रोशनी में मरीजों की जांच करनी पड़ी और पर्ची लिखनी पड़ी।
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अस्पताल कर्मचारी ने बताया कि जब से ओपीडी विभाग को दूसरे भवन में शिफ्ट किया गया है, तब से किसी भी ओपीडी में उचित लाइट की व्यवस्था नहीं है। कुछ विभागों में कर्मचारियों ने अपने स्तर से लाइट लगवाई है। बावजूद इसके, अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
केस – 2 : (ऑर्थो ओपीडी)
आर्थो ओपीडी में स्थित प्लास्टर बेड की स्थिति भी चिंताजनक है। मरीजों को जिस टेबल पर लिटाकर प्लास्टर किया जाता है, उस पर रबर शीट की जगह प्लास्टिक का बोरा बिछाया गया है। उसी बोरे पर मरीजों का प्लास्टर किया जा रहा है।
प्लास्टर बेड की शीट पहले से ही खराब है। इतना ही नहीं, प्लास्टर बेड पर चढ़ने के लिए फुट स्टेप तक उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण मरीजों को कुर्सी का सहारा लेना पड़ता है। वहीं पास में बना बेसिन भी कई महीनों से खराब है। हाथ धोने और प्लास्टर बेड साफ करने के लिए कर्मचारियों को बाहर से पानी लाना पड़ता है।
मरीजों में नाराजगी, प्रशासन मौन इन अव्यवस्थाओं के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन की ओर से न तो कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है और न ही समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया है। प्रमंडलीय मुख्यालय के एकमात्र मेडिकल कॉलेज की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।






