पलामू। पलामू शहर के मेदिनीनगर स्थित श्री परशुराम धाम में आयोजित सप्तदिवसीय शिव महापुराण कथा का रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ समापन हुआ। अंतिम दिन कथा को संबोधित करते हुए शिव महापुराण की मर्मज्ञ पूज्या कृष्णप्रिया जी ने भगवान शिव की कृपा, भक्ति का महत्व और जीवन में आध्यात्मिक आनंद के रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।
पूज्या कृष्णप्रिया जी ने कहा कि देवादिदेव महादेव अत्यंत कृपालु हैं। सच्चे मन, निष्कपट भाव और अटूट विश्वास के साथ यदि कोई भक्त भगवान शिव को मात्र एक लोटा जल अर्पित करता है, तो उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भक्त के मन की शुद्धता और भाव को देखते हैं। माला, भजन और कीर्तन यदि दिखावे के लिए हों तो उनका कोई महत्व नहीं, लेकिन हृदय से किया गया भावपूर्ण समर्पण भगवान को सहज ही प्रसन्न कर देता है।
कथा के दौरान उन्होंने सुख और आनंद के अंतर को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सुख सांसारिक और क्षणिक होता है, जबकि आनंद आध्यात्मिक और स्थायी होता है। सुख बाहर की वस्तुओं से मिलता है, पर आनंद भगवान के चरणों में और स्वयं के भीतर की खोज से प्राप्त होता है। जो भगवान से जुड़ जाता है, उसके जीवन में स्थायी आनंद का वास हो जाता है।गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि गुरु वह सीढ़ी हैं, जो भक्त को भगवान तक पहुंचाते हैं। गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा के बिना ईश्वर की अनुभूति संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने अहंकार त्याग कर सामान्य भक्त भाव से भगवान के दर्शन करने की सीख दी।
कथा में 12 ज्योतिर्लिंगों का भी विस्तार से वर्णन किया गया और उनके दर्शन से मिलने वाले पुण्य व फल की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि शिव भक्ति से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि जीवन में शांति, समृद्धि और संतुलन भी आता है।समापन अवसर पर देवी जी ने गृहस्थ जीवन में प्रेम, सहनशीलता और आपसी समझ बनाए रखने का संदेश दिया। कथा के अंतिम दिन पूज्या कृष्णप्रिया जी सहित उपस्थित श्रद्धालु भावुक नजर आए। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि अपने जीवन को शिव भक्ति, देश सेवा और सत्कर्मों में लगाएं। इस प्रकार शिव महापुराण कथा का भव्य और भावनात्मक समापन हुआ।






