मेदिनीनगर।
‘आइजे तो करम आबै, लोराते लहसते करम हमर मांझे आलै…’ जैसे पारंपरिक करम गीतों और मांदर की थाप से मंगलवार को जीएलए कॉलेज के जेएन दीक्षित छात्रावास परिसर गुलजार रहा। पलामू प्रमंडलीय आदिवासी छात्र संघ की ओर से आयोजित करम पर्व समारोह में आदिवासी समाज की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में युवक-युवतियों ने गीत और नृत्य प्रस्तुत कर समारोह को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत अखरा में विधिवत करम पूजा से हुई। पाहन इंद्रदेव उरांव ने पूजा संपन्न कराई, जबकि अंदिप उरांव और भरत उरांव ने सहयोग किया। ज्योति छात्रावास की छात्राओं ने स्वागत गीत के साथ करम पर्व के पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए।
इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम में युवक-युवतियों ने मांदर की थाप पर सामूहिक नृत्य किया। पारंपरिक गीतों पर कलाकारों के कदमों की थिरकन ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। अतिथियों ने भी लोकनृत्य में सहभागिता की।
मुख्य अतिथि समाजसेवी ज्ञानचंद पांडेय ने कहा कि करम पर्व प्रकृति के प्रति आदिवासी समाज की आस्था और संरक्षण की भावना का प्रतीक है। उन्होंने पेड़ों की कटाई रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता बताई।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. अजीत सेठ ने करम पर्व को प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देने वाला पर्व बताया। प्रोक्टर डॉ. मृत्युंजय कुमार और प्रभारी प्राचार्य डॉ. रिचा सिंह ने भी प्रकृति संरक्षण व पौधरोपण पर जोर दिया। डॉ. कैलाश उरांव ने भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता बताई। आईआरबी के अवर निरीक्षक निर्मल उपाध्याय ने करम पर्व को भाई-बहन के प्रेम और सामाजिक समरसता का पर्व बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बर्नाड टोप्पो और रवि रंजन मिंज ने किया। डॉ. संजय बाड़ा ने स्वागत भाषण दिया। अतिथियों को अंगवस्त्र और पौधा देकर सम्मानित किया गया। मौके पर सहायक निरीक्षक कुलदीप चौधरी, डॉ. आरके झा, डॉ. रविशंकर, डॉ. अनूप, डॉ. गणेश, विकास टोप्पो, छात्र संघ अध्यक्ष अंदिप उरांव, भरत उरांव, उदय राम सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।






