पलामू जिले में स्कूली शिक्षा से दूर हो चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से एक नई सामाजिक-शैक्षणिक पहल ‘पलामू परवाज़’ की शुरुआत की गई है चैनपुर के खुराकला मे आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम के दौरान जिले के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने इस विशेष अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय ऐसे बच्चों तक पहुंच बनाना है जो विपरीत परिस्थितियों या किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं या फिर जिन्होंने अब तक कभी विद्यालय में कदम नहीं रखा है।
शुभारंभ के अवसर पर उपायुक्त ने उपस्थित बच्चों, अभिभावकों एवं स्थानीय नागरिकों से सीधे संवाद करते हुए जीवन में शिक्षा के दूरगामी महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने, उनके अधिकारों के प्रति सजग करने और उनके स्वर्णिम भविष्य की मजबूत नींव रखने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने अभिभावकों का आह्वान किया कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दें और उन्हें नियमित विद्यालय भेजने के लिए निरंतर प्रेरित करते रहें।
इस पहल के तहत इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बच्चों की शिक्षा का दायित्व केवल सरकार या शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें माता-पिता और संपूर्ण समाज की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। यदि कोई बच्चा किसी वजह से स्कूल से वंचित हो जाता है, तो उसे शिक्षा से दूर रहने देने के बजाय समाज को सामूहिक प्रयास करके उसे पुन: विद्यालय तक पहुंचाना चाहिए।
‘पलामू परवाज़’ अभियान का मूल उद्देश्य भी यही है कि ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उनके अभिभावकों को जागरूक किया जाए और हर बच्चे को अपने सपनों को पूरा करने का समान अवसर मिले।
चैनपुर के इस आयोजन में सौ से अधिक बच्चों ने अपने माता-पिता के साथ सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान फैली जागरूकता का सकारात्मक प्रभाव अभिभावकों पर स्पष्ट रूप से देखा गया, जिन्होंने शिक्षा के महत्व को समझते हुए बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के दायित्व को स्वीकार किया।
कुल मिलाकर, यह अभियान पलामू में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है, जिसकी वास्तविक सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि धरातल पर वंचित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें स्कूल से जोड़ने का कार्य कितनी मुस्तैदी से किया जाता है।






