जांच रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि के बाद कार्रवाई, घटना के एक सप्ताह बाद प्रशासन ने उठाया कदम,दो प्रसूताओं और नवजात की मौत के मामले में होगी FIR
मेदिनीनगर (पलामू)।
पलामू जिले के मेदिनीनगर स्थित पांकी रोड के जीवन ज्योति नर्सिंग होम में दो प्रसूताओं और एक नवजात की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया है। कथित चिकित्सकीय लापरवाही से हुई इन मौतों के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों के फरार रहने की बात सामने आई थी। जांच रिपोर्ट में अस्पताल में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में इलाज के दौरान पाटन क्षेत्र की सुमन कुमारी और गढ़वा क्षेत्र की पूजा कुमारी की प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। इसी दौरान एक नवजात की भी जान चली गई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त के निर्देश पर सिविल सर्जन डॉ. अनिल श्रीवास्तव के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की गई थी। टीम की औचक जांच में अस्पताल में गंभीर लापरवाही और मरीजों की देखभाल के लिए केवल एक एएनएम के मौजूद रहने की बात सामने आई। जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की।
संयुक्त टीम ने पहुंचकर अस्पताल को किया सील
गुरुवार देर शाम प्रशिक्षु आईएएस ऋतिक मेहता, सदर एसडीओ संजय पांडे और लेस्लीगंज के अंचल अधिकारी सह सदर प्रखंड विकास पदाधिकारी की संयुक्त टीम जीवन ज्योति नर्सिंग होम पहुंची। टीम ने अस्पताल को पूरी तरह सील कर दिया।
इस दौरान प्रशिक्षु आईएएस ऋतिक मेहता ने मीडिया को बताया कि उपायुक्त के निर्देश पर गठित जांच टीम की रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही और गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसी आधार पर सीलिंग की कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एक सप्ताह बाद हुई कार्रवाई
बताया जाता है कि एक प्रसूता की मौत शुक्रवार रात, जबकि दूसरी प्रसूता ने शनिवार सुबह दम तोड़ दिया था। एक नवजात की मौत भी शनिवार को हुई थी। घटना के करीब एक सप्ताह बाद प्रशासन की ओर से अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की गई है।
इस मामले ने निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, प्रसव के दौरान आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर पुलिस की आगे की जांच और दोषियों के खिलाफ होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है।






