मेदिनीनगर।
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) में विशेष ऑडिट के दौरान सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कई भुगतानों पर रोक लगा दी है। कुलसचिव डॉ. नफीस अहमद के अनुसार, उत्तर पुस्तिका एवं गोपनीय दस्तावेजों की छपाई तथा द्वितीय दीक्षांत समारोह के बाद छपवाए गए डिग्री प्रमाणपत्रों के भुगतान की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।
जानकारी के अनुसार, उत्तर पुस्तिका और अन्य गोपनीय दस्तावेजों की छपाई पर करीब 25 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के एक प्रिंटर से करीब 37 लाख रुपये में डिग्री प्रमाणपत्र छपवाए गए थे। प्रिंटर की ओर से डिग्रियों के परिवहन के लिए करीब 1.20 लाख रुपये का अतिरिक्त भाड़ा भी दावा किया गया है। कुलसचिव ने बताया कि ऑडिट में उठे बिंदुओं के मद्देनजर इन भुगतानों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं कुलपति के लिए खरीदे गए 76,999 रुपये के मोबाइल फोन की खरीद में निर्धारित राशि से अधिक खर्च होने का मामला भी सामने आया है। कुलसचिव के अनुसार अतिरिक्त करीब 16,999 रुपये की राशि की रिकवरी की जाएगी।
कुलसचिव ने बताया कि विशेष ऑडिट के बाद झारखंड अंकेक्षण निदेशालय के उप निदेशक बिरसा बिरचंद लकड़ा का पत्र विश्वविद्यालय को प्राप्त हुआ है। उनके निर्देश के अनुरूप संबंधित विभागों से मामलों का आकलन करने को कहा गया है। अधिकांश मामले परीक्षा और वित्त विभाग से जुड़े हैं। वर्ष 2019-20 में पदस्थ रहे तत्कालीन रजिस्ट्रार से संबंधित मामलों में भी पत्राचार किया गया है। उन्होंने कहा कि विशेष ऑडिट में इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज का ऑडिट नहीं हो सका है। यदि वित्त सलाहकार इसके ऑडिट की अनुशंसा करते हैं, तो प्रस्ताव राज्यपाल सचिवालय को भेजा जाएगा।
इधर, आपसू छात्र नेता कमलेश कुमार पांडेय ने वित्तीय दुरुपयोग और गबन की राशि की वसूली सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने दोषियों को चिन्हित कर तत्काल कानूनी कार्रवाई करने तथा दोषियों के बैंक खातों को फ्रीज करने की अनुशंसा करने की मांग की।
एचआरडी से रिलिविंग का पत्र नहीं मिला : कुलसचिव
कुलसचिव डॉ. नफीस अहमद ने कहा कि राज्यपाल के आदेश के तहत वह कुलसचिव के पद पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एचआरडी से कार्यमुक्त (रिलिविंग) किए जाने संबंधी कोई पत्र उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। यदि ऐसा कोई पत्र कुलपति को मिला है तो इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
उन्होंने कहा कि कुलपति के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाए जाने के बाद कुलपति की ओर से उन्हें रिलिविंग संबंधी पत्र जारी किया गया था, जिसे उन्होंने नियम-परिनियम के विपरीत बताया। कुलसचिव के अनुसार राज्यपाल ने अगले आदेश तक उन्हें कुलसचिव के पद पर कार्य करने का निर्देश दिया है।






