पाटन (पलामू)।
पाटन थाना क्षेत्र के सतौवा गांव निवासी 28 वर्षीय रामव्रत भुइयां की 23 दिनों से जारी तलाश शनिवार को महाराष्ट्र के वीरभूनगर रेलवे स्टेशन से शव बरामद होने के बाद खत्म हुई। शनिवार सुबह करीब 11 बजे पुलिस एंबुलेंस से शव को पाटन थाना लेकर पहुंची। शव पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण थाना गेट पर जुट गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने थाना के मुख्य गेट को घेरकर सड़क जाम कर दिया।
ग्रामीणों ने रामव्रत की मौत की पूरी जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और मृतक के आश्रितों को मुआवजा देने की मांग की। पुलिस अधिकारियों के जांच और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद थाना गेट के पास से जाम हटाया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने पाटन के लोहिया चौक के समीप करीब एक घंटे तक सड़क जाम रखा। पुलिस के आश्वासन के बाद वहां से भी जाम हटाया गया। बाद में पुलिस शव को लेकर सतौवा गांव पहुंची।
11 सितंबर को अखिलेश के साथ निकला था रामव्रत
परिजनों के अनुसार, रामव्रत भुइयां 11 सितंबर को गांव के ही अखिलेश भुइयां के साथ घर से निकला था। बताया गया कि अखिलेश उसे काम के सिलसिले में मदुरै पहुंचाने की बात कहकर साथ ले गया था। घर से निकलने के बाद रामव्रत का परिजनों से संपर्क टूट गया। कई दिनों तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिजनों ने अनहोनी की आशंका जताई।
परिजनों और ग्रामीणों ने अखिलेश को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया था। रामव्रत की पत्नी रूबी देवी और बहन पार्वती देवी ने उस समय हत्या की आशंका जताते हुए मामले की जांच की मांग की थी। अब 23 दिन बाद महाराष्ट्र में शव मिलने के बाद परिजनों की ओर से उठाए गए सवालों की जांच की मांग तेज हो गई है।
रेलवे टिकट से हुई शव की पहचान
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के वीरभूनगर रेलवे स्टेशन से जीआरपी को एक शव मिला था। शव के पास मिले रेलवे टिकट के आधार पर पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई। बताया गया कि रामव्रत के पास हटिया से चेन्नई जाने के लिए दो लोगों का टिकट था। जीआरपी ने टिकट और शव की तस्वीर पलामू पुलिस को भेजी। इसके बाद पुलिस ने तस्वीर परिजनों को दिखाई, जिसके आधार पर उन्होंने शव की पहचान रामव्रत भुइयां के रूप में की।
इसके बाद पाटन थाना के सहायक अवर निरीक्षक प्रभात किरण को मृतक के परिजनों के साथ महाराष्ट्र भेजा गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस टीम शव को शनिवार को पाटन लेकर पहुंची।
मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रामव्रत महाराष्ट्र के वीरभूनगर रेलवे स्टेशन तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। उसके साथ यात्रा करने वाला दूसरा व्यक्ति कौन था, यह भी जांच का अहम बिंदु है। परिजनों द्वारा पहले से हत्या की आशंका जताए जाने के कारण पुलिस की जांच पर ग्रामीणों की नजर बनी हुई है।
पलामू एसपी कपिल चौधरी के निर्देश पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। राज्य के वित्त मंत्री सह छतरपुर-पाटन विधायक राधाकृष्ण किशोर की पहल के बाद पुलिस टीम गठित कर शव को महाराष्ट्र से पाटन लाने की कार्रवाई की गई। ग्रामीणों के अनुसार शव को गांव तक लाने के लिए करीब 1.10 लाख रुपये चंदा कर जुटाए गए, जिसके बाद एंबुलेंस से शव पाटन लाया गया।
परिजनों के अनुसार रामव्रत परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य था। उसकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
मौके पर पाटन पश्चिमी जिला परिषद सदस्य जयशंकर सिंह, सतौवा पंचायत के मुखिया अखिलेश पासवान, मंजू देवी, श्यामलाल, नागेंद्र, विवेक सिंह, श्रवण भुइयां, विकास रवि, गीरेंद्र प्रसाद, तूफानी राम, बाबूलाल राम, मृतक की पत्नी रूबी देवी, सोना देवी, प्रभा देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।






