कुलपति से 9 बिंदुओं पर मांगा जवाब, नोटशीट और स्वीकृति सार्वजनिक करने की मांग
मेदिनीनगर। नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU) में नियुक्तियों, अतिरिक्त प्रभार और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अखिल पलामू छात्र संघ (आपसू) ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कई गंभीर सवालों के जवाब सार्वजनिक करने की मांग की है। आपसू नेता कुणाल किशोर ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी व्यक्ति की निजी संस्था नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और जनता के पैसे से संचालित सार्वजनिक संस्था है। ऐसे में प्रत्येक नियुक्ति, अतिरिक्त प्रभार और वित्तीय निर्णय की वैधानिकता एवं प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए।
आपसू ने सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालय में ‘One Man–One Post’ की व्यवस्था प्रभावी थी, तो एक ही व्यक्ति को कई महत्वपूर्ण पदों का अतिरिक्त प्रभार क्यों दिया गया? संगठन ने यह भी पूछा कि शिक्षकों को वित्त, PRO, DSW सहित अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां देने के लिए किस नियम और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ली गई।
कुणाल किशोर ने कहा कि YSNM कॉलेज की डॉ. मनोरमा सिंह को CCDC समेत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां, GLA कॉलेज के अंग्रेजी शिक्षक डॉ. विमल कुमार सिंह को वित्त पदाधिकारी तथा अन्य शिक्षकों को प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी देने से जुड़े आदेश और अनुमोदन सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
आपसू ने OSD, PRO और अन्य विशेष पदों के सृजन एवं नियुक्ति की वैधानिकता पर भी सवाल उठाया है। संगठन का कहना है कि यदि किसी पद का सृजन या स्वीकृति नहीं थी, तो नियुक्ति किस कानूनी आधार पर की गई, इसकी पूरी फाइल सार्वजनिक होनी चाहिए।
कुलपति से 9 सवालों का जवाब मांग रही आपसू
आपसू नेता कुणाल किशोर ने अंकेक्षण आपत्तियों और विभिन्न
नियुक्तियों से जुड़े नौ प्रमुख सवाल उठाए हैं
29 जनवरी, 9 फरवरी और 26 फरवरी 2026 की अंकेक्षण आपत्तियों के बाद भी रोकड़ पुस्त संधारण क्यों प्रस्तुत नहीं हुआ?
28 जून 2025 को डॉ. विमल सिंह को वित्त पदाधिकारी बनाए जाने के समय उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। क्या इसके लिए कुलाधिपति की स्वीकृति ली गई थी?
पूर्व कुलसचिव शैलेश कुमार मिश्रा का कार्यकाल 27 जून 2025 को समाप्त होने के बाद 26 जून 2025 के पत्र के माध्यम से अवधि विस्तार दिया गया। क्या इसके लिए कुलाधिपति की स्वीकृति ली गई थी?
11 अप्रैल 2025 के पत्र के माध्यम से वनस्पति विज्ञान की सहायक प्राध्यापक डॉ. विनिता दीक्षित को PRO पद पर नियुक्त करने का वैधानिक आधार क्या था?
19 अप्रैल 2025 को GLA कॉलेज की इतिहास विभाग की सहायक प्राध्यापक भावना सिंह को छात्र निवारण समिति का प्रभारी पदाधिकारी किस नियम के तहत बनाया गया?
YSNM कॉलेज की सहायक प्राध्यापक संगीता कुजुर को DSW में विशेष सेवा अधिकारी के पद पर नियुक्त करने के लिए किस नियम और अधिकार का इस्तेमाल किया गया?
क्या IPS निदेशक का पद स्वीकृत है? यदि हां, तो डॉ. सुरेंद्र पांडेय की नियुक्ति किसकी अनुमति से की गई?
कुलाधिपति के आदेश से नियुक्त परीक्षा नियंत्रक डॉ. रवि शंकर को किस कथित अनियमित भुगतान के मामले में हटाया गया और नए प्रभारी परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति के लिए क्या अनुमोदन लिया गया?
2.68 करोड़ रुपये के भुगतान से संबंधित पृष्ठ संख्या CR/167 और CR/174 में बताई जा रही विसंगतियों पर विश्वविद्यालय प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है?
कुणाल किशोर ने कहा कि आपसू किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी नहीं ठहरा रहा है, लेकिन दस्तावेजों से जुड़े सवालों के जवाब सार्वजनिक होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सभी नियुक्तियां और वित्तीय निर्णय नियमसम्मत हैं तो संबंधित नोटशीट, आदेश, स्वीकृति और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति सार्वजनिक की जाए। वहीं, यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
आपसू ने विश्वविद्यालय में हुई अन्य विशेष नियुक्तियों की भी जांच कराने की मांग की है। संगठन ने सभी नियुक्तियों एवं अतिरिक्त प्रभार से संबंधित नोटशीट, आदेश, स्वीकृति, कुलाधिपति/राजभवन की अनुमति, कार्यकाल और संबंधित वित्तीय भुगतान सार्वजनिक करने तथा विशेष अंकेक्षण में उठाए गए प्रत्येक बिंदु की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।






