पलामू।
झारखंड में गैर-शैक्षणिक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु अब फिर से 65 वर्ष होगी। राज्य सरकार ने चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 67 वर्ष से घटाकर 65 वर्ष करने का निर्णय लिया है। हालांकि, यह व्यवस्था स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी संकल्प की तारीख से दो वर्ष बाद प्रभावी होगी। विभाग ने 16 सितंबर 2026 को इस संबंध में संकल्प जारी किया है।
सरकार ने बताया है कि कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों की कमी और विशेष परिस्थितियों को देखते हुए सेवानिवृत्ति आयु 65 से बढ़ाकर 67 वर्ष की गई थी। अब कोरोना काल समाप्त हो चुका है और चिकित्सा व्यवस्था में वैसी आपात स्थिति नहीं है। ऐसे में पूर्व व्यवस्था को बहाल करने का निर्णय लिया गया है।
सरकार के अनुसार, अधिक उम्र के चिकित्सकों की सुदूर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में तैनाती को लेकर अनिच्छा के मामले सामने आते रहे हैं। वहीं, उच्च प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी देने पर भी कुछ चिकित्सक असमर्थता जताते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में चुनौती आती है। चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने कोरोना के बाद 176 विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारी, 338 चिकित्सा पदाधिकारी, 13 दंत चिकित्सक और 55 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से भी चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है।
मंत्रिपरिषद ने 25 अगस्त 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद विभाग ने 16 सितंबर को संकल्प जारी किया। केंद्र सरकार के साथ उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी गैर-शैक्षणिक व विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष या उससे कम है। झारखंड सेवा संहिता के नियम-73 में आवश्यक संशोधन






