
चंदवा से 10 किमी दूर पहाड़ों की तलहटी में बसा प्राचीन शक्ति पीठ, नवरात्रि में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब
चंदवा ।
पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय से लगभग 102 किलोमीटर दूर चंदवा नगर में स्थित है माँ नगर भगवती उग्रतारा मंदिर, जिसे तंत्र शक्ति पीठ के रूप में भी जाना जाता है, यह मंदिर चंदवा और बालूमाथ के पहाड़ियों कई बीच स्थित है। मेदिनीनगर रांची मुख्य पथ(चंदवा) से करीब 10 किलोमीटर दूर हरे-भरे और मनमोहक पहाड़ों की तलहटी में बसा यह प्राचीन मंदिर क्षेत्र का एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं धार्मिक केंद्र है। जहां पर आस्था, तंत्र साधना और लोककथाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
प्राचीन इतिहास से जुड़ी मान्यताएँ
मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना प्राचीन काल में हुई थी और इसका ऐतिहासिक संबंध टोरी के शासक पिताम्बर नाथ शाही एवं रानी अहिल्याबाई से जुड़ा हुआ है। लोककथाओं के अनुसार, पिताम्बर नाथ शाही एक बार शिकार के दौरान मांकरी गाँव पहुँचे थे। प्यास लगने पर जब वे जोड़ा तालाब पर पानी पीने गए, तो तालाब में उन्हें दो प्रतिमाएँ प्राप्त हुईं जिसमें एक माँ लक्ष्मी की और दूसरी माँ उग्रतारा की। कहा जाता है कि इन प्रतिमाओं को वे कुछ दिन पहले स्वप्न में देख चुके थे। इस दिव्य संकेत को माँ का आह्वान मानते हुए उन्होंने उसी स्थान पर मंदिर निर्माण का निर्णय लिया, जो आगे चलकर श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया।
सामाजिक समरसता की कथा रानी अहिल्याबाई से जुड़ी हुई है
स्थानीय निवासी नीतीश कुमार बताते है की बुजुर्गों से सुनी लोककथा के अनुसार, रानी अहिल्याबाई ने बंगाल यात्रा के दौरान यह संकल्प लिया था कि समाज के सभी वर्गों को समान रूप से पूजा-अधिकार मिलना चाहिए। इसी संकल्प के तहत उन्होंने माँ उग्रतारा मंदिर का निर्माण करवाया और तत्कालीन सामाजिक बाधाओं को तोड़ते हुए सभी जाति-वर्ग के लोगों के लिए पूजा का मार्ग प्रशस्त किया। यह मंदिर सामाजिक समरसता और समानता का भी प्रतीक माना जाता है।
नवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
माँ उग्रतारा मंदिर अपने भव्य नवरात्रि उत्सव के लिए विख्यात है। नवरात्रि के दौरान यहाँ हजारों श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुँचते हैं। वैसे तो पूरे नवरात्रि भक्ति मय माहौल बना रहता है पर सप्तमी से लेकर दशमी तक भक्ति, संगीत, आरती और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच माँ उग्रतारा के दर्शन के लिए पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है।
हिंदू आस्था का मुख्य केंद्र है नगर भगवती मंदिर
स्थानीय लोगों के साथ-साथ झारखंड, बिहार और आसपास के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए माँ उग्रतारा मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी बन चुका है। प्रकृति की गोद में स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और शक्ति प्रदान करने वाला स्थल माना जाता है।






