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यह विश्वविद्यालय नहीं, अव्यवस्था का केंद्र बन गया है : आपसू नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के 17वें स्थापना दिवस पर छात्र संगठन का तीखा प्रहार

On: January 17, 2026 11:54 PM
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मेदिनीनगर :
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, मेदिनीनगर (पलामू) के स्थापना के 17 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर स्थानीय छात्र संगठन आपसू ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आपसू के केंद्रीय संयोजक राहुल दुबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि विश्वविद्यालय का बीते एक वर्ष का संचालन छात्र-विरोधी, अपारदर्शी और अव्यवस्थित रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 21-A (शिक्षा का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समान अवसर) की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि करदाताओं के धन और राज्य सरकार के अनुदान से संचालित यह सार्वजनिक विश्वविद्यालय अपने संवैधानिक, शैक्षणिक और नैतिक दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहा है। विगत एक वर्ष की उपलब्धियों के नाम पर भ्रष्टाचार, तानाशाही और शैक्षणिक अराजकता चरम पर रही। आपसू ने विश्वविद्यालय की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास मद, परीक्षा शुल्क एवं अन्य फंड के उपयोग का कोई सार्वजनिक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। विभिन्न मदों में खर्च के बावजूद जमीनी स्तर पर विकास कार्य दिखाई नहीं देते, जिससे वित्तीय अनियमितता या घोटाले की आशंका उत्पन्न होती है।

छात्रों से पूर्ण परीक्षा शुल्क लेने के बाद भी परिणामों में देरी, गलत सिलेबस के कारण परीक्षाओं का रद्द होना और उसके बाद किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति न दिया जाना प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है। वहीं, डिग्री और प्रमाण-पत्रों में महीनों की देरी से छात्रों का उच्च शिक्षा और रोजगार का अधिकार प्रभावित हो रहा है। शिक्षण व्यवस्था को लेकर भी संगठन ने गंभीर चिंता जताई। UGC मानकों के विपरीत नियमित शिक्षकों की भारी कमी, अतिथि शिक्षकों पर अत्यधिक निर्भरता और अकादमिक काउंसिल के निर्णयों के नाम पर अयोग्य चयन से शिक्षा की गुणवत्ता गिरने का आरोप लगाया गया। इसके अलावा, PhD प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव, जर्जर भवन, प्रयोगशालाओं व पुस्तकालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, बार-बार ठप होने वाला ऑनलाइन पोर्टल और निष्क्रिय छात्र शिकायत निवारण तंत्र को भी मुद्दा बनाया गया।

आपसू ने कहा कि छात्र प्रतिनिधित्व की अनदेखी, सीनेट की बैठक न होना, छात्र संघ चुनाव न कराना और छात्र आंदोलनों को समस्या के रूप में देखना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सत्र विलंब के कारण छात्रों की आयु सीमा प्रभावित हो रही है, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरियों से वंचित हो रहे हैं।

अंत में संगठन ने उच्चस्तरीय स्वतंत्र जाँच, समयबद्ध परीक्षा-परिणाम व प्रमाण-पत्र की कानूनी गारंटी, UGC मानकों के अनुसार स्थायी नियुक्तियाँ, छात्रवृत्ति की समय-सीमा, सीनेट की नियमित बैठक, छात्र संघ चुनाव और भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों को पदमुक्त करने की मांग की। आपसू ने चेतावनी दी कि सुधार नहीं होने पर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।

ipnnews14@gmail.com

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