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विश्व हिंदी दिवस पर मेदिनीनगर में सजा “तरुण कवि सम्मेलन”, युवा कवियों की रचनाओं ने मोहा मन

On: January 10, 2026 7:35 AM
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मेदिनीनगर।
मेदिनीनगर स्थित गणेश लाल अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा विश्व हिंदी दिवस बड़े ही उत्साह, गरिमा एवं साहित्यिक वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को समर्पित “तरुण कवि सम्मेलन” का आयोजन किया गया, जिसमें युवा रचनाकारों ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण एवं समकालीन विषयों से जुड़ी कविताओं का सशक्त पाठ किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात युवा कवियों ने स्वरचित रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सम्मेलन में प्रस्तुत रचनाओं से यह स्पष्ट हुआ कि हिंदी आज भी संवेदनाओं, विचारों और सामाजिक सरोकारों की जीवंत एवं प्रभावशाली भाषा बनी हुई है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ सम्मानित किया गया।

इस साहित्यिक आयोजन की अध्यक्षता नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय की सीसीडीसी सह विश्वविद्यालय हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मनोरमा सिंह ने की। कार्यक्रम का आयोजन गणेश लाल अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. विभा शंकर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। मंच संचालन स्नातकोत्तर हिंदी प्रथम सेमेस्टर के छात्र कौशल मिश्रा ने कुशलतापूर्वक किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. मनोरमा सिंह ने विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए दैनिक जीवन में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों की कविताओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए लेखन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन भी प्रदान किया।

वहीं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विभा शंकर ने कहा कि हिंदी आज वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना चुकी है और साहित्य, संस्कृति, तकनीक, व्यापार सहित जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रभावी भूमिका निभा रही है। उन्होंने हिंदी के संरक्षण एवं संवर्द्धन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम में हिंदी कविता की समृद्ध परंपरा पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत से लेकर कालिदास, सूरदास, तुलसीदास, मीरा, कबीर, जायसी और आधुनिक काल के भारतेन्दु, निराला, प्रसाद, महादेवी व पंत तक हिंदी कविता मानवीय संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति का माध्यम रही है। आज हिंदी कविता जन-जन की आवाज बन चुकी है।
कवि सम्मेलन में सोनम, सिमरन, रानी, अर्चना, जया भारद्वाज, अनीश रेख़्ता, गोविंद मेहता, विशाल मेहता तथा थिएटर आर्टिस्ट सत्यजीत ने अपनी स्वरचित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। इस अवसर पर हिंदी विभाग की शिक्षिकाएँ डॉ. लीना कुमारी, नीलम पांडे, अन्ना हंसदा, नीतू कुमारी, अचला कुंडला एवं शशि देवी उपस्थित रहीं। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से यह आयोजन अत्यंत सफल, प्रेरणादायी एवं स्मरणीय बन गया

ipnnews14@gmail.com

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