मेदिनीनगर।
अपराध की घटनाओं को अंजाम देने के लिए कुख्यात अपराधी प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा ने आपस में हाथ मिला लिया है। दोनों के द्वारा मिलकर रंगदारी और फिरौती के उद्देश्य से गोलीबारी कर क्षेत्र में दहशत फैलाने की योजना बनाई जा रही थी। इसका खुलासा सुजीत सिन्हा गिरोह से जुड़े आठ अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद हुआ है। पुलिस ने उनके पास से हथियार, जिंदा कारतूस और आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है।
इस संबंध में पलामू पुलिस कप्तान रीष्मा रमेशन ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि चिंयाकी स्थित निर्माणाधीन ओवरब्रिज, सिंगरा फोरलेन के अमातन नदी के पास तथा सिंगरा निर्माणाधीन ओवरब्रिज के समीप कुछ युवक गोलीबारी कर दहशत फैलाने वाले हैं। सूचना के आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीनों स्थानों पर छापेमारी कर अपराध को अंजाम देने से पहले ही आठ अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से दो देसी पिस्टल, दो देसी कट्टा, चार मैगजीन, 14 जिंदा कारतूस, दहशत फैलाने के लिए छोड़े गए पर्चे सहित अन्य सामग्री बरामद की है।
गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार अपराधियों में
अमित चौधरी उर्फ ऋतिक चौधरी (25), निवासी मेरौना, भवनाथपुर थाना क्षेत्र (गढ़वा), आकाश शुक्ला (25), निवासी चौरा, लेस्लीगंज थाना क्षेत्र, कौशल पासवान उर्फ सौरव कुमार (19), निवासी छकनाडीह, तरहसी थाना क्षेत्र, बाबी कुमार (19), निवासी सुठा, पाटन थाना क्षेत्र, नीरज चंद्रवंशी (20), निवासी पोखराहा, सदर थाना क्षेत्र, छोटन पासवान उर्फ एलेक्स पीहू (25), निवासी रजबंधा, हैदरनगर थाना क्षेत्र, अख्तर अंसारी (19), निवासी इमली कुमराहा, पाटन थाना क्षेत्र, अविनाश गिरि (25), निवासी हरतुआ, लेस्लीगंज थाना क्षेत्र शामिल हैं।
एनएचएआई कार्यस्थल को बनाना था निशाना
एसपी ने बताया कि पूछताछ में गिरफ्तार अपराधियों ने स्वीकार किया है कि उनका मकसद एनएचएआई के कार्यस्थल पर मजदूरों पर फायरिंग कर दहशत फैलाना था, ताकि भय का माहौल बनाकर मोटी रकम की रंगदारी वसूली जा सके।
‘कुबेर’ नाम से चल रहा था गैंग का नेटवर्क
एसपी ने बताया कि सुजीत सिन्हा गैंग को ‘कुबेर’ नामक छद्म नाम से संचालित किया जा रहा था। ‘कुबेर’ ही प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा के बीच समन्वयक (को-ऑर्डिनेटर) की भूमिका निभा रहा था, जो आपराधिक प्रवृत्ति के युवकों को संगठित कर गिरोह चला रहा था। इस गिरोह का मुख्य हैंडलर अमित चौधरी उर्फ ऋतिक था, जो ‘कुबेर’ से मिले निर्देशों को अन्य अपराधियों तक पहुंचाता था और वारदात की रणनीति तैयार करता था। एसपी के अनुसार, घटना को अंजाम देने के बाद अमित चौधरी के विदेश भागने की योजना भी थी।
पकड़े जाने पर प्रिंस खान का नाम लेने का निर्देश
पूछताछ में यह भी सामने आया कि यदि अपराध करते समय किसी को पकड़ा जाता, तो प्रिंस खान का नाम लेने का निर्देश दिया गया था, क्योंकि वह फिलहाल विदेश में बताया जा रहा है।
छापेमारी दल में ये रहे शामिल
छापेमारी दल में प्रशिक्षु डीएसपी राजीव रंजन, सदर व पंडवा थाना पुलिस, टीओपी-1 तथा तकनीकी शाखा की टीम शामिल थी। पुलिस आगे भी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में पूछताछ और जांच कर रही है।






