मेदिनीनगर।
नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय का 17 स्थापना दिवस शनिवार को मनाया गया। विश्वविद्यालय के आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में विश्विद्यालय के कुलपति डॉ दिनेश सिंह, पूर्व प्रोफेसर केके मिश्रा, डीएसडब्ल्यू डॉ सुरेन्द्र पांडे ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। भौतिक विभाग के पूर्व प्रोफेसर केके मिश्रा ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए स्वामी विवेकानंद की जीवनी से प्रेरणा लेकर प्रयास करना चाहिए। विश्वविद्यालय का हर विद्यार्थी स्वामी विवेकानंद बनने की क्षमता रखता है, जरूरत है इमानदारी पूर्वक प्रयास का। वह शनिवार को नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के 17वां स्थापना दिवस दिवस के मौके पर विश्वविद्यालय के आडिटोरियम हाल में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में पढ़ाई का महत्व तो है ही, लेकिन उसमें भी राष्ट्र प्रथम की भावना होनी चाहिए। जीवन में हमेशा असत्य से सत्य की ओर और अंधेरा से उजाला की ओर चलना चाहिए। शिक्षा व्यक्तित्व निर्माण की प्रथम पाठशाला होती है। छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े सपने संजोए जा सकते है। विद्यार्थियों व कर्मचारियों को विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। पलामू की धरती शहीदों और क्रांतिकारियों की भूमि रही है। नीलांबर पीतांबर महान देशभक्त व क्रांतिकारी थे, जिनके संघर्ष और बलिदान को सदैव स्मरण रखा जाएगा।
कुलपति डा. दिनेश कुमार सिंह ने शहीद नीलांबर पीतांबर को नमन करते हुए सभागार में उपस्थित सभी लोगों को स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को सुदृढ़ बनाने के लिए शिक्षण, अनुसंधान व प्रशासन तीन स्तरों पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। दो से तीन सालों में सत्र को पूरी तरह नियमित कर लिया जाएगा। अनुसंधान के लिए आधारभूत संरचना विकसित करने तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में कार्य चल रहा है। माडल डिग्री कालेजों में टापर व गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थियों को पढ़ाने का अवसर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जीएलए कालेज को साइंस, जेएस कालेज का कामर्स के रूप में मान्यता प्राप्त है। योध सिंह नामधारी महिला कालेज जिस स्थिति में है उसी उसी स्थिति में चलाया जा जाएगा। विश्वविद्याल जल्द की आर्ट की पढ़ाई के लिए एक अलग से कालेज बनाने के बिंदु पर काम कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान तीन पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुतियां की गई। सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर उत्साहवर्द्धन किया गया।
स्वागत भाषण में डीएसडब्ल्यू डॉ. एस.के. पांडेय ने दिया तथा कुलसचिव डा. नफीस अहमद के द्वारा विश्विद्यालय का प्रतिवेदन पेश किया। कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण व राष्ट्र निर्माण करना है। छात्रहित को सर्वोपरि बताते हुए सत्र को नियमित करने, समय पर नामांकन, परीक्षा और परिणाम देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। पीजी फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा फरवरी में कराने की बात कही। एनपीयू 50 महाविद्यालयों के साथ एक वृहद विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हो चुका है। नए डिग्री कालेजों में नामांकन प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। विद्यार्थियों को व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है। नौ टापर विद्यार्थियों को नए डिग्री कालेजों में पदस्थापित किया गया है, वहीं गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थियों को अवसर देने को लेकर सूची भी जारी की गई है। उन्होंने यूजीसी मानकों के अनुरूप कार्य, नए कालेजों में सोलर ऊर्जा की पहल व विश्वविद्यालय अंतर्गत विभिन्न कालेजों की प्रगति की जानकारी दी। मौके पर डा. मनोरमा सिंह, डा. संगीता कुजूर, डा. मोहिनी गुप्ता, डा. नीता सिंह, डा. अजीत सिंह, डा.विभास सिंह, डा. प्रदीप कुमार सहित विश्विविद्यालय के सभी अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे






