
मेदिनीनगर।
पलामू सीमा से सटे गढ़वा जिले के छपरदागा निवासी और पलामू से शिक्षा प्राप्त अनिल कुमार चौधरी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा में सफलता हासिल कर असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) पद प्राप्त किया है। अनिल की यह उपलब्धि जितनी उनकी मेहनत का परिणाम है, उतनी ही उनके परिवार और पत्नी अनीता कुमारी के अटूट सहयोग की मिसाल भी है।आज जब समाज में टूटते परिवारों और पति-पत्नी के बीच बढ़ती दूरी की खबरें सामने आती रहती हैं, ऐसे समय में अनिल और उनकी पत्नी की यह कहानी मजबूत रिश्ते और त्याग का प्रतीक बनकर सामने आई है।2022 में विवाह के बाद उस समय आईआरबी में कार्यरत पत्नी अनीता कुमारी ने अनिल का हौसला बढ़ाया। वर्तमान में वे मेदिनीनगर सदर प्रखंड के सुआ पंचायत में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अनिल को पूरी तरह करियर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। आर्थिक सहयोग हो या मानसिक मजबूती—हर कदम पर अनीता ने पति का साथ निभाया। अनिल के अनुसार, “मेरी सफलता के पीछे सबसे बड़ा सहारा मेरी पत्नी का विश्वास था।”अनिल के पिता ब्रह्मदेव चौधरी किसान हैं, जबकि माता देवी गृहणी हैं। परिवार ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी और बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अनिल ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही पूरी की और दसवीं तक की पढ़ाई ननिहाल, नरसिंहपुर पथरा हाई स्कूल से की। स्नातक के बाद उन्होंने 2017 में तैयारी शुरू की और दो वर्षों तक पटना में रहकर अध्ययन किया।संघर्ष के इन वर्षों में उन्होंने कई परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता साथ नहीं देती थी। दो बार JPSC में कुछ अंकों से चूकने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। आठ साल की निरंतर मेहनत, असफलताओं से सीख और परिवार का सहयोग आखिरकार रंग लाया।ASO पद पर चयन के बाद पिता ब्रह्मदेव चौधरी गर्व से कहते हैं, “हमारे परिवार से यह पहली सरकारी नौकरी है।” गांव के लोग भी अनिल की उपलब्धि को प्रेरणादायक बताते हैं और कहते हैं कि पति-पत्नी के बीच विश्वास, परिवार का सहयोग और धैर्य ही सफलता की असली चाबी है।अनिल और अनीता की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संघर्षों के बीच लक्ष्य हासिल करने की राह पर हैं। यह दंपती साबित करता है कि मजबूत पारिवारिक समर्थन हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती।






